लूट केसी कैसी

 आजकल मजबूरों को लूटने का एक अलग ही तरीका ईजाद किया गया है।छोटी बीमारी को अति बड़ा बताकर ,बड़े प्रायवेट अस्पतालों में असीमित चार्ज लगाकर मरीज स्वजनों को लूटा जा रहा है।

एक बात समझ नही आती कि क्या कोई इंसान वो भी अति शिक्षित इतना निर्दयी हो सकता है कि अपनी पैसे कमाने की हवस में इंसानियत को भी भूल जाता है।मगर आजकल यह हो रहा है धन्वन्तरी के मंदिरों में।
ऐसा क्या खर्चा होता है इन लोगों का कि बरसो तक लूटने के बाद भी इनकी पूर्ति नही होती है।दया,मजबूरी,इंसानियत से इनका दूर दूर तक वास्ता नही होता।
लोग इनके चुंगल में फंसने के बाद बर्बाद हो जाते है मगर इन्हें उन पर दया नही आती।इनकी हैवानियत बढ़ती ही जा रही है ,मगर शासन का कोई हस्तक्षेप नहीं होता है इन पर ,अर्थात सरकारों की पुरी सहभागिता होती है इस धंदे में।
अनावश्यक जाँच करने को मजबूर करते है,फिर उन जांचों के नाम पर अनन्त लूट।उसके बाद मेडिसिन की कीमत मन मर्जी की ,जिसके जो समझ मे आया लूट लिया ।
क्या कभी किसी का ध्यान जाएगा इस ओर ।
मनन जरूर करना ।
धन्यवाद
श्रद्धानन्द उपाध्याय कोद ,धार ,मध्यप्रदेश